Rescue from incurable disease

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लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |
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  • Rakt Mokshan (Blood disengagement therapy)

    Rakt Mokshan (Blood disengagement therapy) 
    रक्त मोक्षण चिकित्सा (Blood Letting Therapy)- आयुर्वेदीय पंचकर्म के अंतर्गत आने वाली एक शोधन की पद्धति है| आचार्य चरक के उत्तरवर्ती आचार्य सुश्रुत ने इस प्रक्रिया को विशेष महत्त्व दिया है| कई प्रकार के रोगों विशेषकर रक्त विकारों के लिए यह चिकित्सा विशेष रूप से पसंद की जाती है|
    इस पद्धती में विकृत रक्त को कई विधियों से शरीर के बाहर निकाला जाता है|
    रक्त मोक्षण के प्रकार- Type of Blood disengagement-

    1. शस्त्र द्वारा By Instruments. सुई (निडिल) अथवा किसी अन्य शस्त्र द्वारा|  
    2. विना शस्त्र Without  Instruments.
    रक्त मोक्षण की निम्न विधियाँ प्रचलित हैं| 
    1. वात विकारों में  श्रृंग (by using Horn of animals ) ,
    2. पित्त विकारों में जलोका(Leech Therapy )
    3. कफ विकारों में अलाबू (Dried bottle gourd )
    4. जब रोग सारे शरीर में फेल गया हो तो एसे त्रिदोषज रोगों में शिरावेध (Venupuncture / venesection), के द्वारा रक्त मोक्षण किया जाता है|
    रक्त मोक्षण से उपचारित हो सकने वाले रोग-
    रक्त मोक्षंण से मुख्यत: पित्त दोष प्रभावित रक्त रोग एवं त्वचा की समस्याओं को ठीक किया जा सकता है|  इसके अंतर्गत -
    • सोराइसिस (Psoriasis) जैसे त्वचा को क्षति पहुँचाने वाले रोग|
    • जोड़ों के कुछ रोग जैसे वात रक्त (Gouty arthritis)
    • विसर्प/ परिसर्प (हर्पीज Herpes)
    • कुछ नेत्र विकार, व्रण एवं विद्रधि (Abscess)
    • उच्च रक्तचाप,  
    • मुँहासे, एकने,  
    • वैवर्ण्यता discolouration- त्वचा की विरंजकता (जैसे श्वित्र , लयूकोडर्मा या सफ़ेद दाग, काले दाग,आदि )
    • शोफ़, शोथ आदि त्वचा और अन्य भागों की सूजन, swelling, Edema.
    • चर्म रोग - खाज-खुजली-दाद- विचर्चिका- चर्म दल, आदि त्वचा रोगों
    • व्रण, विद्रधि, पीडिका, Abscess, Ulcer
    • यकृत और प्लीहा रोग,  
    • त्वचा पर चकत्ते, आदि में रक्त मोक्षण से लाभ मिलता है|
    • असृग्धर- रक्त-प्रदर (Leucorrhoea) आदि स्त्री रोग 
    रक्त-मोक्षण एक शल्य चिकित्सा (Surgery) है, इसलिए आचार्यों ने भी क्रिया स्थान को पवित्रता पूर्ण विसंक्रमित वातावरण युक्त {cleanness  sterile  environment} रखने के निर्देश दिए है, आधुनिक सन्दर्भों में देखें तो रक्त मोक्षण भी संक्रमण (Infection) से बचकर करना ही पवित्रता है| अत: मानद पंचकर्म केन्द्रों (पंजीकृत वैधानिक Legally registered) में इसके लिए आधुनिकतम उपलब्ध व्यवस्था शल्य प्रक्रिया (surgical procedure) की तरह ही मुख्य प्रक्रिया के साथ पूर्व, और पश्चात् नियमों {Pre and Post Operative Instructions} का पालन किया जाता है| 

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