Freedom from obesity? [मोटापे से मुक्ति?]

मोटापे से मुक्ति?
मोटापा एक प्रेत की तरह पिछले कई वर्षों से झकझोर रहा है| मोटापे से डाइवितिज, ह्रदय रोग, ब्लड प्रेशर, आदि- आदि भयावह रोग तो हो ही रहें हैं इससे नपुंसकता बढ़ने से देश की विशेषकर आर्थिक संपन्न वर्ग में, सन्तति या जन्म दर भी प्रभावित हो रही है| क्योंकि निर्धन वर्ग में मोटापा न के बराबर पाया जाता है|
Freedom from obesity? [मोटापे से मुक्ति?]
केवल व्यक्ति ही नहीं कई देश के प्रशासक भी इसका हल खोजने में लगे हुए है|
कहीं फ़ास्ट फ़ूड प्रतिवंधित किया जा रहा है कहीं वर्तमान दवाओं को दोषी ठहराया जा रहा है, कहीं इसका कारण सुविधा भोगी आराम पसंद जीवन माना जा रहा है|
फ़ास्ट फ़ूड, दवाओं विशेषकर स्टीयरोइड का दुष्प्रभाव व्यायाम या शारीरिक श्रम का अभाव, खान-पान, वातावरण, मिलावट, आलस, आदि यह सब सम्पन्न वर्ग को अधिक आसानी से उपलब्ध है| मोटापे के लिए कोई एक या अनेक कारण हो सकते हें|
क्या कारण हैं? की व्यक्ति मोटा होने लगता है| 

सभी कारणों से एक बात एक सामान है, की सबसे शरीर की पाचन प्रणाली जिसे मेटाबोलिस्ज्म भी कहते हें प्रभावित होती है| भोजन से आयुर्वेद अनुसार  रस रक्त मांस मेद अस्थि मज्जा और शुक्र सात धातु  कर्म से उसी प्रकार बनती जातीं हें जैसे खेत या बाग़ में पानी एक क्यारी से दूसरी क्यारी में पहुंचकर पोध्र को पोषित कर्ता है| एक भी क्यारी टूटी की अगली क्यारी के पौधे को पानी का अभाव हुआ और वह प्रभावित हुआ| और जिस क्यारी को पानी अधिक मिला उस क्यारी का पोधा अधिक बढता गया|
बस यही सब होता है शरीर में भी रक्त से मांस तक तो ठीक बनता है, आगे मेद शरीर में एकत्र होकर शरीर को मोटा करने लगता है| आगे मेद का लाभ अस्थि-मज्जा शुक्र धातु को न हो पाने से या उनका पोषण न हो पाने से हड्डियों के रोग, शुक्र पोषण न होने से नपुंसकता होने लगती है| स्त्रियों में सन्तान हीनता, ब्रेस्ट केंसर, बच्चे दानी में ट्यूमर आदि रोग इसी शुक्र धातु क्षय का कारण होती है|
रकत वाहिकाओं में जमा मेद या चर्बी जिसे कोलेष्ट्रोल कहते हें, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, डाइविटीज, उत्पन्न कर देती है|
अब जब वजन बडने लगता है, तब चिंता होना स्वभाविक है अब चिन्तनशील जो इसके मोटापे के दुष्परिणाम जानता है वह, हर संभव कोशिश शुरू कर देता है, जैसे व्यायाम, योग, डाइटिंग, वाकिंग,आदि आदि| पर अक्सर कोई लाभ नहीं मिलता क्योंकि एक बार रस से शुक्र तक पाचन प्रणाली या मेटाबोलिजम विगडा तो कोई उपाय कारगर नहीं होता, मोटापा तो जस का तस रहता है कमजोरी चक्कर, कुपोषण आदि नई समस्याए सर उठाने लगतीं है|    
आखिर इस मोटापे से मुक्ति का उपाय क्या है?
इसका उपाय आयुर्वेद ने दिया गया है, वह है पूरी पाचन प्रणाली को संशोधित कर दिया जाये| यह कार्य होता है- पंचकर्म शोधन चिकित्सा से|
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यह शोधन या पंचकर्म चिकित्सा न केवल मोटापे को नियंत्रित करती है बल्कि किसी मेटाबोलिक कारण से कमजोर क्रश हुए व्यक्ति को भी नव जीवन प्रदान कर वजन को साम्य भी कर देती है|
इससे शरीर का शोधन होकर जीवन में उल्लास, शरीर की शक्ति में वृद्धि, नपुंसकता या बंध्यता से मुक्ति, आदि या कहें तो नवजीवन, की प्राप्ति या कायाकल्प Rejuvenation  हो जाता है| सभी धातुये ठीक प्रकार से अगले को पोषण देकर समृद्ध करतीं हें, और अंत में “ओज या नूर” रूपी तेज चेहरे पर दिखने लगता है| वजन कम या अधिक जरुरत अनुसार होकर नियंत्रित हो जाता है|
आचार्य चरक ने स्वस्थ्य व्यक्ति को प्रति वर्ष वसंत ऋतू में संशोधन का निर्देश दिया है| मोटापे सहित किसी भी रोग से ग्रस्त रोगी को वर्ष में कभी भी शोधन किया जा सकता है| परन्तु यह सब होना चाहिए, एक कुशल और अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक के निर्देशन में|
सब स्वस्थ्य रहें और सुखी,  दीर्घ, जीवन जिए इस कामना के साथ|
अस्तु|
- वैध्य मधु सूदन व्यास उज्जैन. 
 -देखें -दैनिक जीवन में पंचकर्म?
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