Rescue from incurable disease

Rescue from incurable disease
लाइलाज बीमारी से मुक्ति उपाय है - आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा |

मैकार्डल रोग( McArdle's Disease मांस पेशियों में में असहनीय दर्द), की आयुर्वेदिक चिकित्सा .

इस प्रश्न का उत्तर चिकित्सा विशेषकर आयुर्वेद के चिकित्सक और छात्रों के लिए उपयोगी है |
प्रश्न –
मैं अंकित कुमार हूँ और मैं बचपन से McArdle रोग से पीड़ित हूँ। और अब इस समस्या पिछले दो साल से बढ़ रही है। मैं 500 मीटर भी चलने में सक्षम नहीं हूँ। क्योंकि बाद मैं अपने पैरों में विशेष कर पैरों पीछे की ओर अधिक दर्द महसूस होता है, और उसके बाद मुझे रुकना होता है।
मैं किसी प्रकार का शारीरिक व्यायाम और चलने का कोई कार्य नहीं कर पा रहा हूँ मुझे इस रोग से संबंधित जो उपचार के किसी भी प्रकार दे।  
उत्तर-
अंकित जी  आप मैकार्डल रोग( McArdle's Disease (Glycogen Storage Disease Type V) से पीड़ित हें। डॉ मेक अर्डाल ने १९५९ में यह जाना की यह मांसपेशी  में होने वाला रोग ग्लायकोजिन टूटने का एक मेटाबोलिक रोग है। यह बहुत ही कम पाया जाता है।
इस रोग की शुरुआत आम तौर पर बचपन से ही होती है। अक्सर यह जींस से संबधित होती है। अधिकतर मामलों में आयु के 30 -40  वर्ष तक  निदान भी नहीं हो पाता। इसमें पेरो की मांस पेशियों में में असहनीय दर्द, एंठन, जल्दी थकान होना, व्यायाम न कर पाना, मूत्र में मयोग्लोबिन जाना ( Myoglobinuria) मिलता है । इससे मांसपेशी नष्ट होने लगतीं हें, और बडती आयु के साथ साथ रोगी अधिक कमजोर होता चला जाता है। तीब्रावस्था के समय या कभी कभी  गुर्दे का रोग या फेल हो जाने पर, रोगी को  आकस्मिक सेवा की जरुरत हो सकती है।
रोग का पता मांसपेशी की बायोप्सी के द्वारा लगाया जा सकता है। मांसपेशी में मायोफोसफोरिलेज की कमी या आभाव मिलता है।  
इसकी चिकित्सा हेतु विटामिन बी 6 , हाई प्रोटीन वाला खाना और फिजिओथेरेपि और विशेषज्ञ की देख रेख में व्यायाम से लाभ होता है।
आयुर्वेद द्वारा इसकी चिकित्सा सफलता पूर्वक की जा सकती है , इसमें रोगी की की मेटाबोलिक समस्या को दूर करने कुछ दशमूल और, भुई आवंला का प्रयोग बहुत अधिक लाभकारी है। रोगी की तीव्र वेदना की स्तिथि में स्नेहन स्वेदन से तात्कालिक लाभ मिलता है । 
     पंचकर्म चिकित्सा से ठीक किया जा सकता है - किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ की देखरेख में स्नेहन, स्वेदन, पत्रपिंड स्वेद, या षष्टिक शाली स्वेद,   पश्चात् आवश्यक बस्ती अदि संसर्जन क्रम चलाकर सामान्य रखा जा सकता है। एक अच्छी भोजन व्यवस्था पोषक आहार कार्यक्रम का निर्धारण कर लाभ दिया जा सकता है। इस रोग का सम्बन्ध जींस से है यह अनुवांशिक भी हो सकती है,  इसलिए पुन: न हो चिकित्सा सतत रखनी होती है। आजीवन दशमुलारिष्ट और भुई (या भूमि) आवंला का चूर्ण/घन सत्व की टैब आदि का प्रयोग करते रहना चाहिए।इससे लाभ बना रहेगा। प्रोटीन खाद्य और हरी सब्जियां फल जो विटामिन बी से भरपूर हों लाभदायक होते हें।

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स्वास्थ है हमारा अधिकार १

हमारा लक्ष्य सामान्य जन से लेकर प्रत्येक विशिष्ट जन को समग्र स्वस्थ्य का लाभ पहुँचाना है| पंचकर्म सहित आयुर्वेद चिकित्सा, स्वास्थय हेतु लाभकारी लेख, इच्छित को स्वास्थ्य प्रशिक्षण, और स्वास्थ्य विषयक जन जागरण करना है| आयुर्वेदिक चिकित्सा – यह आयुर्वेद विज्ञानं के रूप में विश्व की पुरातन चिकित्सा पद्ध्ति है, जो ‘समग्र शरीर’ (अर्थात शरीर, मन और आत्मा) को स्वस्थ्य करती है|

निशुल्क परामर्श

जीवन के चार चरणौ में (आश्रम) में वान-प्रस्थ,ओर सन्यास अंतिम चरण माना गया है, तीसरे चरण की आयु में पहुंचकर वर्तमान परिस्थिती में वान-प्रस्थ का अर्थ वन-गमन न मान कर अपने अभी तक के सम्पुर्ण अनुभवोंं का लाभ अन्य चिकित्सकौं,ओर समाज के अन्य वर्ग को प्रदान करना मान कर, अपने निवास एमआइजी 4/1 प्रगति नगर उज्जैन मप्र पर धर्मार्थ चिकित्सा सेवा प्रारंंभ कर दी गई है। कोई भी रोगी प्रतिदिन सोमवार से शनी वार तक प्रात: 9 से 12 एवंं दोपहर 2 से 6 बजे तक न्युनतम 10/- रु प्रतिदिन टोकन शुल्क (निर्धनों को निशुल्क आवश्यक निशुल्क ओषधि हेतु राशी) का सह्योग कर चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सकेगा। हमारे द्वारा लिखित ऑषधियांं सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल स्टोर से क्रय की जा सकेंगी। पंचकर्म आदि आवश्यक प्रक्रिया जो अधिकतम 10% रोगियोंं को आवश्यक होगी वह न्युनतम शुल्क पर उपलब्ध की जा सकेगी। क्रपया चिकित्सा परामर्श के लिये फोन पर आग्रह न करेंं। ।

चिकित्सक सहयोगी बने:
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